
मेरो बांके बिहारी अनमोल रसिया,
दोहा – बांके बिहारी की,
बांकी अदा पे,
मैं बार बार बलि जाऊं,
जनम जनम वृन्दावन राजा,
तेरे चरणन की रज पाऊं।
मेरो कुंज बिहारी अनमोल रसिया,
हो रसबसिया हो रंगरसिया,
ओ मेरे मन बसिया,
तर्ज – मेरे हाथों में।
प्यारी-प्यारी सलोनी तेरी सुरतिया,
मेरे मन में बसी है तेरी मुरतिया,
तू है मेरा मैं हूं तेरी,
ओ मेरे सांवरिया,
कैसी जादू भरी है तेरी बांसुरिया,
मैंने जबसे सुनी मैं हो गई बावरिया,
मैंने जब से सुनी मैं हो गई बावरिया,
मेरे मन में मेरे तन में,
बसे नट नागरिया,
मोटी मोटी यह तेरी कजरारी अखियां,
मीठी मीठी मधुर मंद मंद हंसीया,
मीठी मीठी मधुर मंद मंद हसिया,
मुकुट तिरछा नैन तिरछे,
चरण में पैजनिया,
मैं हूं पागल तुम्हारी तुम हो मेरे पिया,
तेरे दर्शन को तरसे है मेरा जिया,
‘चित्र विचित्र’ ने जीवन,
तुम्हारे नाम कर दिया,
गायक – श्री चित्र विचित्र जी महाराज।
प्रेषक – शेखर चौधरी।
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