
मैंने भोग सजायो है थाल मईया कर लिजो स्वीकार
मैंने भोग सजायो है थाल,
मईया कर लिजो स्वीकार,
मईया कर लिजो,
माँ कर लिजो,
तर्ज – मेरा श्री वैष्णव परिवार।
शबरी के बैर समझ करके,
तुम पा लिजो यो चखकर के,
ये है मीठा की भरमार,
जिन भक्तों के घर जाकर के,
उन्हें धन्य किए माँ पा करके,
वैसा ही समझ सरकार,
उन भक्तों सा नही बन पाया,
ना वैसा भाव जगा पाया,
यही कमी रही हर बार,
जो तुम पाओ वह ज्ञात नही,
इतनी मेरी औकात नही,
मैं आँसु बहाउँ धार,
– वीडियो उपलब्ध नही।
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