
मैं तो दौड़ी दौड़ी मंदरिया में,
जाऊं ए माय,
सपना में आयो सांवरियो,
म्हारा सपना में आयो सांवरियो।।
घर में नी लागे मन बाहर लागे,
दौड़ दौड़ मन सत्संग भागे,
म्हने हरी की तो हर घड़ी आवे रे माय,
नातो नहीं लागे मने रिश्तो नी लागे,
कोई नाती नहीं लागे मने पोती नी लागे,
म्हने नटवर नागर से नातो ए माय,
नींद नी आवे म्हने आनंद आवे,
सपनो में आकर मन ललचावे,
मने छम छम करि चमकावे ए माय,
लाज भी आवे मने घणो यो लजावे,
घर में जा सो गई लाज के मारे,
मने हिचकी दे दे बुलावे ए माय,
खानो नहीं भावे मने पीनो नहीं भावे,
रास रचइयो म्हने घणो तरसावे,
मने मोहनिया री मूरत घणी भावे ए माय,
कमल नी भावे मने चमन नी भावे,
गगन नी भावे मने वतन नी भावे,
काली कमली वालो घणो भावे ए माय,
स्वर – संत श्री कमलकिशोर जी नागर।
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