
मैं तो शिव ही शिव को ध्याऊँ, जल से स्नान कराऊँ,
मैं तो चावल चंदन चढ़ाऊँ, मैं तो चावल चंदन चढ़ाऊँ ।
और आक धतूरा ल्याऊँ, मैं तो शिव ही शिव को ध्याऊं, जल से स्नान कराऊँ ।।
मैं तो जलधारा बरसाऊँ, मैं तो जलधारा बरसाऊँ,
और अगड़बंब मुख गाऊँ, और अगड़बंब मुख गाऊँ ।
तब प्रसन्न भए शिव राजा, तब प्रसन्न भए शिव राजा ।
वर माँगो सारू काजा, वर माँगो सारू काजा ।।
मोको और कछु ना चाहिए, श्री राधा कृष्ण मिलइये ।
धन नरसी बुद्धि तिहारी, धन नरसी बुद्धि तिहारी ।
ते तो वर मांग्यो अति भारी, ते तो वर मांग्यो अति भारी ।।
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