
मैं निर्धन तू सेठ साँवरा के फायदा इस यारी का
मैं निर्धन तू सेठ साँवरा,
के फायदा इस यारी का,
बता कद ताला खोलेगा,
बाबा बंद किस्मत म्हारी का।।
तर्ज – यार तेरा चेतक पे।
तेरे ते ना मांगूगा तो,
और बता कित्त जाऊँ मैं,
चेतक का के करना,
ओडी रैड फरारी चाहूँ मैं,
मैं पैदल खुद मजा लेवे सै,
लीले की असवारी का,
इतना दे दे साँवरिया,
हो घर में सारी मौज मेरे,
मैं भी जिद्द का पक्का सुं,
ना मांगण आऊँ रोज तेरे,
सारी दुनिया में सै चर्चा,
तेरी लखदातारी का,
मांग मांग के थक गया सूं,
इब शर्म घणी मनै आवे सै,
के मजबूरी मनै देन में,
इतनी देर लगावे सै,
भगत तेरा भी बाट देख रहया,
कदका अपनी बारी का,
आज पड़या सै पाला सुनले,
मांनू मैं भी हार नहीं,
या फिर कह दे साँवरिया तनै,
‘भीमसैन’ ते प्यार नहीं,
मैं तेरा तू मेरा सै,
के लेना दुनियादारी का,
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