
मैं शिव का हूँ शिव मेरे हैं
मैं और क्या मांगूं शंकर से
मेरे मन में उनके डेरे हैं
मैंने बहुत बार खायी ठोकर
गिरते को संभाला है उसने
औकात मेरे से ऊपर ही
कितना कुछ दे डाला उसने
मेरे पार लगाये बेढे हैं
हर वक़्त वो नेढ़े नेढ़े हैं
मेरे दिन बाबा ने फेडे हैं
मैं जब से शिव का भक्त हुआ
मेरे दिल से बिदा हुई नफरत
पशु पक्षियों से भी प्रेम हुआ
मासूम सी हो गयी ये फितरत
सब चेहरे उसके चेहरे हैं
उसके ही अँधेरे सवेरे हैं
शिव प्रेम ही मुझको घेरे है
भोले ने दिया है ये जीवन
भोले के नाम पे है जीवन
रवि राज के दिल में है शंकर
ऐसे ही नहीं चलती धड़कन
हर सांस पे उनके पहरे हैं
सब रस्ते उनपे ठहरे हैं
मेरे सब दिन रात सुनहरे हैं
सिठाता तेरा चोला काला डोरा
ओ शम्भुआ हाथे शोठीयो
ओ या हे
मैं और क्या मांगू शंकर से ओ
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.



