
मैं हक़ से कहती हूँ
मैं हक़ से कहती हु श्याम हमारा है ।
मुझे पग पग पे वो देता सहारा है ।।
जब जब मैंने इसका नाम लिया है ।
इस ने आके पल में मुझे थाम लिया है ।।
कहने को तो यु सारे ही अपने है ।
तेरी वजह से पुरे हुये हर सपने है ।।
जो कुछ है पास मेरे सब कुछ तो तुम्हरा है ।
हारे हुये को हर कोई बहलाता है ।।
केवल तू ही उनका साथ निभाता है ।
जब जब मैं इसका नाम लिया है ।।
बाबुल जैसा मुझको तुम से प्यार मिला ।
मुझको समज ने वाला कोई हक़ दार मिला ।।
श्याम कहे गिनी को तूने ही स्वारा है ।
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