
मैया मैया ओ मेरी मैया,
शान तन्नै या दिखाई ना,
मन्नै टोली किते तुं पाई ना।।
तर्ज – काला काला कहे गुजरी।
पर्वत पर्वत ढुंढी मेरी मैया,
जयकार तेरी लाई ना,
मईया मईया ओ मेरी मईया,
नगरी नगरी ढ़़ुढ़ी मेरी मैया,
रेहमत तेरी गाई ना,
मंदिर मंदिर ढुंढ़ी मेरी मैया,
जोत तेरी जगाई ना,
कीर्तन कीर्तन ढुंढ़ी मेरी मैया,
सुदेश भक्त ने दिखाई मां,
मन्नै भक्तां मे बैठी पाई मां,
गायक – जयप्रकाश शर्मा।
प्रेषक – राकेश कुमार जी।
खरक जाटान(रोहतक)
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