
मोरवी मां रो रो कहे
एक बार तो माता बनके देखो ।
निष्ठुर सवारियां, मोरवी मां रो रो कहे ।।
क्या होती ह ममता, क्या रिश्ते होते है,
एक मां का दिल समझे क्या नाते होते है ।
इस बात को तुम देवकी से पूछो सवारियां,
मोरवी मां रो रो कहे ।।
मेरे लाल को मेने नज़ो आलम पाला,
वो वीर था छोटा कितना भोला भाला ।
एएएए छलिए तेरी चाल को वो समझ नहीं पाया,
मेरे लाल से कोई यूं लड़ नहीं सकता,
तू जानता था की युद्ध कर नही सकता ।
तेरे सुदर्शन ने भी मना कर्दिया था सवारियां,
ये सोच कर माता गुस्से में आगई,
और श्राप देने को तैयार हो गई ।
मेरे शीश के दानी बाबा ने खुद,
मां को रोक लिया,
ओ मां इसे में ये वरदान दे दूंगा,
कलयुग मै में इसको अपना नाम दे दूंगा ।
खाटू में मेरे नाम से ये पूजा जाएगा,
ये खाटू वाला है वही शीश का दानी,
जिसको पूजते हैं कलयुग के नर नारी ।
एक बार तो खाटू जाके देखो महिमा इसकी क्या,
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