
मोहे छलियाँ धनी सतावे न
मत रोके डगर नन्द लाल मोहे छलियाँ धनी सतावे न,
क्यों राधा करे सवाल तू माखन मोहे खिलावे न,
अब जान दे मोहे बीहतर भी,
थोडा माखन दे दे हद कर दी,
नखरे में तेरी दाल मैं डले पास तू आवे न,
गुजरियां करे सवाल तू माखन मोहे खिलावे न,
मेरो माखन ना है फ़ोकट को क्यों काम करे खट पट को,
हट जो नटखट गोपाल इक पलके वार लगावे न,
मोहे माखन कान्हा मिले नही,
मटकी पे बेला जिहले नही,
लिखे राही चंद कमाल मेरा रामअवतार क्यों गावे न,
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