
^देख, छवि साँवरी सी,
मैं तो, हुई बाँवरी सी
मेरे मन को, व्ही भा गया,,,
मोहे, सांवरा पसंद आ गया
यमुना तट पे, बंसी वट पे,
दिखने लगा वोह, हर पनघट पे
^वोह मेरे, आगे पीछे डोले,
मोहे, गोपी गोपी बोले
मीठी बंसी, सुना वोह गया,,,
मुरली मनोहर, नटवर सुंदर,
मन को चुरा ले एक नज़र पर
^मेरे नैनो में समाए,
मेरी नींदों में भी आए
मेरे रोमों में रमता गया,,,
देखा जो रूप तेरा, कमली सी हो गई,
कमली सी हो गई, पगली सी हो गई
^ओ तेरा, नखसख शृंगार,
तेरे, नैनों में प्यार
मेरे, ह्रदय में बस्ता गया,,,
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