
मोह माया के चक्कर में मै नाम हरी का भूल गयी लिरिक्स दिन का चैन रात की निंदिया
दोनों खो के बैठ गई,
मोह माया के चक्कर में
मै नाम हरी का भूल गयी
बालकपन में खेली खाई
सखियों के संग मस्त रही,
सयानी हो गई शादी कर दी
दो परिवारों में बट गई,
कभी पीहर में कभी सासुरे
आन जान में लगी रही,
पहली अवस्था चालू हो गई
बेटी बेटा होने लगे,
पालन पोषण करने लग गई
दिन और रात में मग्न रही,
बाद में सोऊं बखते उठ लं
बन कोल्हू का बेल गई,
दूसरी अवस्था चालू हो गई
बेटी बेटा ब्याहन लगी,
कसका कपड़ा किसके गहने
किसका घर बनवाने लगी,
जिम्मेदारी पूरी हो गई
चुप होके में बैठ गई,
तीसरी अवस्था चालू हो गई
पोती पोता होने लगे,
बेटे न्यारे होने लग गये
मां को साझा करने लगे,
ये घर तेरा ये घर मेरा
मां की खाट का ठौर नहीं,
ओरी बहना हुआ सबेरा
अब सोबन का टाइम नहीं,
सारी सखियां इकट्ठी हो गई
हरी भजन में लग गई,
दिन का चैन रात की निंदिया
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