
म्हारी सुरता सुहागन नार,
कुवारी क्यों फिरे,
मारी घणी समझनी नार,
घणी समझनी नार,
माने सतगुरु मिलीया नही,
भूलीयोडी बीरा यु फिरू ओ जी।।
मारा सतगुरु विलपर लाभ,
लगन लिखावीये,
अरे अमरापुर रे माय,
लगनीया मेलना ओ जी,
मारी सुरता सुहागन नार,
पाँच पच्चीस रो साथ,
वोनेला वापरे,
अरे लागे वोनेलो रो मोह,
लाडली नखरा करे ओ जी,
सत रो सेवरो पेर घणो,
फेरे ग्यान रो,
अरे ममता री मेहन्दी,
आड पीठी हरी नाम री ओ जी,
सोहन शिखर रे माय,
चवरिया मांडसी,
अरे हरी सु हथलेवो जोड,
लाडली फेरा फिरे ओ जी,
मंगला गाया चार,
विवाह भरतावीयो,
अरे ब्रह्म वाचे वेद,
गुरु चेली परनीया ओ जी,
लागो पियुजी रो प्रेम,
पिहर नही आवडे,
अरे ध्यान घोडे असवार,
घरे हालो आपने ओ जी,
विवाह कोई संत करे,
बोल्या संत कबीर,
सूरा नर यु चढे ओ जी,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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