
म्हारो सेठ साँवरो मोरछड़ी घुमावण लाग रयो
खाटू को गज़ब नजारों मने भवन लाग रहो,
महरो सेठ संवारो मोर छड़ी घुमावन ला गयो,
ये श्याम कुंद की महिमा मेरे मुख से वरनी ना जावे,
जो न्हावे सचे मन से फिर पाप सभी धुल जावे,
अमृत सो मीठा पानी मने प्यावान लाग यो ,
म्हारो सेठ साँवरो मोरछड़ी..........
या श्याम बगीची न्यारी भगता नु लागे प्यारी,
कोयाल्दी गीत सुनावे यु लागी उसको न्यारी,
भगती को रंग नो श्याम धनि बरसावन लाग यो
मेरे श्याम धनि की सूरत सारे जग से बड़ी निराली,
तेरे नाम ढंका बाजे करता सबकी रखवाली,
भगता की नैया पल में हिरवान लाग यो
तुझे शीश का दानी बोलू या अश्वीलवती को लालो,
तेरे दर पे दलीप भी आवे ये गाव खिमोली वालो
अर्पित शर्मा भी तेरा गुण गावन लाग यो,
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