
यह श्याम बड़ा अलबेला
मेरी मटकी में मार गया डेला यह श्याम बड़ा अलबेला,
यह श्याम बड़ा अलबेला, यह कृष्ण बड़ा अलबेला,
मेरी मटकी में मार गया डेला...
कभी गंगा के तीर कभी जमुना के तीर,
कभी सरयू में नहावे अकेला यह श्याम बड़ा अलबेला,
कभी मथुरा शहर कभी गोकुल नगर,
बरसाने में घूमे अकेला यह श्याम बड़ा अलबेला,
कभी विशाखा के संग कभी ललिता के संग,
कभी राधा संग हूं मैं अकेला यह श्याम बड़ा अलबेला,
कभी गइयां के संग कभी बछड़ा के संग,
कभी मुरली बजावे अकेला यह श्याम बड़ा अलबेला,
कभी ग्वालों के संग कभी दाऊ भैया के संग,
श्रीदामा संग घूमे अकेला यह श्याम बड़ा अलबेला,
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