
याद थारी आवे रे घणो ही सतावे रे श्याम
याद थारी आवे रे,
घणो ही सतावे रे।।
तर्ज – उड़ जा काले कावा।
वापस कईया आऊँ सांवरा,
जी ना लागे रे,
पंछी बण बण हिवड़ो म्हारो,
खाटू भागे रे,
म्हारे मन में उठे हिलोरे,
याद घणेरी आवे,
कईया छोड़ के जाऊं सांवरा,
मनड़ा कुण समझावे,
म्हारे मन री पीड़ सांवरिया,
थे ही जानो हो,
कुण मन का काला कूण धोला,
थे ही पिछाणो हो,
हे सांवल सरकार याद थारी,
म्हाने क्यों तड़पावे
आऊँ हंसता गाता नैना,
जाता नीर बहावे,
जद जद कसक उठे म्हारे मन में,
खाटू दौड्या आवा,
बैठके थारी ड्योढ़ी ऊपर,
सगली बात बातावा,
कद सी करोला म्हारे मन री,
इतना तो बतलाओ,
जैयां मैं आश्यां थारे दर,
म्हारे घर कदे आओ,
रोए जद सेवकिया थारी,
आख्यां भी भर आवे,
मोटे मोटे नैना से,
आंसूडा भी ढ़लकावे,
‘सोनू’ से थारी प्रीत सांवरिया,
विरला ही कोई जाने,
तेरो यो ‘सूर्यवंशी’ भी,
थाने सब कुछ माने,
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