
ये गर्व भरा मस्तक मेरा प्रभु चरण धूल तक झुकने दे लिरिक्स ये गर्व भरा मस्तक मेरा,
प्रभु चरण धूल तक झुकने दे।
अहंकार विकार भरे मन को,
निज नाम की माला जपने दे,
ये गर्व भरा मस्तक मेरा,
मैं मन के मैल को धो ना सका,
ये जीवन तेरा हो ना सका,
हाँ हो ना सका,
मैं प्रेमी हूँ, इतना ना झुका,
गिर भी जो पडू तो उठने दे,
मैं ज्ञान की बातों में खोया,
और कर्म हीन पड़कर सोया,
जब आँख खुली तो मन रोया,
जग सोये मुझको जगने दे,
जैसा हूँ मैं खोटा या खरा,
निर्दोष शरण में आ तो गया,
हाँ, आ तो गया,
इक बार ये कह दे खाली जा,
या प्रीत की रीत झलकने दे,
ऐसे ही सुन्दर भजन आप निचे दी गयी सूचि में देख सखते है
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