
ये बांसुरी जदुगारी
सुनी तो उचट गयी निंदिया हमारी,
गजब की है ये बांसुरी जदुगारी,
सितम की है ये बांसुरी जदुगारी।।
मधुर नींद टूटी मधुर बैन सुनकर,
कहाँ से मंगाई मुरलिया ये चुनकर,
निकाला कलेजा वो बांके बिहारी,
कहाँ पर मिलोगे किधर श्याम जाँऊ,
लगी अपने दिल की कहाँ पर बुझाऊँ,
कसक कालजे में लगी है करारी,
तुम्हे श्याम बहादुर में कहता रहूंगा,
तेरी बेवफाई को सहता रहूंगा,
पता है कि शिव है वो छलिया मदारी,
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