
ये बांसुरी तेरी बांसुरी,
हाय बांसुरी तेरी बांसुरी,
बनी है सौतन मेरी चाहत की,
कैसे जियूं मैं सांवरे,
तर्ज – ओ साहिबा।
क्यों इकतरफा प्यारे,
तुम प्यार लुटाते हो,
क्यों सरेआम इसपे,
क्यों हाथ फिराते हो,
क्यों बार बार इसको,
होठों से लगाते हो,
क्यों राधा के दिल में,
तूफान उठाते हो,
क्यों हर दम रहती है,
ये तेरे हाथो में,
मेरा चैन चुराती है,
ये बातों बातों में,
मुरली की धुन सुनकर,
सो पाउँ ना रातों में,
ये बाधक बनती है,
अपनी मुलाकातों में,
मैं खुद को बदलूंगी,
या तुझको छोडूंगी,
तेरी झूठी यारी से,
मुख अपना मोडूँगी,
मैं अबला अनाड़ी हूँ,
दिल कबतक रोकूंगी,
चोरी छुपने एक दिन,
तेरी बंसी तोडूंगी,
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