
रंगी गई रंगी गई मैं ता रंगी गई माँ दे नाम वाले रंग विच रंगी गई,
मैं तकड़ी दी जींद निमाणी माँ दे चरनी रंगी गई,
दर दर भटकया नू किसे न झल्लेया,
होंगे मालो माल जदो दर तेरा मलैया,
मैं कमली दुनिया तो डर दी दूर खड़ी ही संगी गई,
सेहज नहीं सी तेरी साहनु कोई नहीं सी जांदा,
तेरी मेहर नाल साहनु हर कोई पहचान दा,
मैं दुनिया दा छड़ दा पला माँ दे चरनी गाण्डी गई,
कोटकपुरे उते मेहर दाती करदे,
खुशिया ने रेहन सारे सूखा वाला वर दे,
मैं कमली दुनिया तो डर दी दूर खड़ी संगी गई,
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