
रंग चढ़िया तेरे प्यार दा
मेरी झंड्यां वाली मइया ॥
मैं होर दी हो गई होर जदों दी,
तेरे नाल ने लाइयाँ ॥
रंग चढ़िया-चढ़िया, रंग चढ़िया-चढ़िया,
रंग चढ़िया-चढ़िया, रंग चढ़िया ॥
ऐसा तेरा रंग चढ़िया जो,
मुड़ के कदी नी लहिणा,
जद तक मेरे साँह चलदे ने,
तेरी हो के रहिणा ॥
छड्ड के सारी दुनिया नूं,
तेरे नाल प्रीतां पाइयाँ,
हर पल तेरे कोल रहवां,
एहो गल्ल मैं चाहवां,
पर मैं औगणहारी किद्दां,
तेरे दिल नूं भावां ॥
तेरे मेरे प्यार दे विच,
ना कदे वी पैण जुदाइयाँ,
तेरे प्यार दे अग्गे लगदा,
मैनूं हर रंग फिक्का,
तेरे लढ़ लग खरा हो गया,
जेहड़ा सी खोटा सिक्का ॥
संदीप जलंधरी उत्ते माँ,
तूं रहमतां ने बरसाइयाँ,
अपलोडर – अनिल राममूर्ति भोपाल
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