
रंग डार गयो री नन्दलाल, सखी री रंग डार गयो
तरज़-ले गई री हमारो चितचोर कन्हैया तेरी बांसुरिया
ओ रंग डार गयो री नंदलाल,सखी री रंग डार गयो
मोरी चुनर कर गयो लाल,सखी री रंग डार गयो,
रंग डार....
अरे बीच बजरिया में आयो सांवरिया,
पकड़ी वानें मोरी कलईयां
ओ सखी मल गयो,मुख पे गुलाल
सखी री रंग डार गयो
ओ मोरी चुनर कर गयो लाल,
सखी री रंग डाल गयो
2. अरे बचते बचाते आई हूँ दौड़ के,
उस छलिया को पीछे छोड़ के
ओ सखी कर दो बंद किवाड़,
3. अरे कुछ तो सखी अब करनो पड़ेगो,
उस छलिया को रंगनो पड़ेगो
ओ सखी ले आओ रंग गुलाल,
रंग डार गयो नंदलाल,
मोरी चुनर कर गयो लाल,
बाबा धसका पागल पानीपत
संपर्कंसुत्र-7206526000
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