
रंग लहरीया मारो मनडो खेतलाजी मे लागो
रंग लहरीया,
मारो मनडो खेतलाजी मे लागो।
दोहा – गाँव सोनाला जावनो,
और लागी मन में आस,
अरे पैदल पैदल जावता,
आयो चैत्र वारो मास।
ए रंग रा लेहरीया,
ओ रंग रा लेहरीया,
सोनाला मे होले सूरज ऊगो हा रे,
रंग रा लेहरीया,
सोनाला मे होले सूरज ऊगो,
अरे हा रे रंग रा लेहरीया,
कोसेलाव ती पैदल संग तो आवे,
चेलोजी तो साथे साथे आवे,
भोपोजी तो साथे पधारे,
भैरव मंडली नाचता पधारे,
सोनाला मे दर्शन करवा आवे,
भेरूजी ने मनावन आवे,
ढोल नगाड़ा नोपत गहरा बाजे,
भगतों रा टोला टोला आवे,
दूर दूर सु दर्शन करवा आवे,
भेरूजी रे चरना शिश निवावे,
खेतलाजी रे चरना शिश निवावे,
दास कन्हैयो थोरा हरीजश गावे,
मारा भेरूजी,
गायक – संत कन्हैयालाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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