
रक्त शिराओं में राणा का,
रह रह आज हिलोरे लेता,
मातृभूमि का कण कण तृण तृण,
हमको आज निमंत्रण देता।।
वीर प्रसुता भारत माँ की,
हम सब हिन्दु है संताने,
हर विपदा जो माँ पर आती,
सहते हैं हम सीना ताने,
युग युग की नीद्रा को तज कर,
फिर से अपना गौरव चेता,
यह वह भूमि जहाँ पर नित नित,
लगता बलिदानों का मेला,
इस धरती के पुत्रो ने ही,
हस हस महा मृत्यु को झेला,
हमको डिगा न पाया कोई,
अगनित आये विश्व विजेता,
आज पुनः आकांत हुई है,
देव भूमि कश्मीर हमारी,
उठो चुनौती को स्वीकारे,
युवकों आज हमारी बारी,
सीमाओं पर हरी दल देखो,
हमको पुनः चुनौती देता,
कही न फिर हमसे छिन जाये,
समय आ गया खींचो वीरो,
पोशो से अब खडक दुदारी,
मिटा विश्व से इन दुष्टों को,
बने जगत के अतुल विजेता,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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