
राधा रानी से मिलना बड़ा जरुरी,
मिलना बड़ा जरुरी,
श्यामा प्यारी से मिलना बड़ा जरुरी।।
जो मैं होती पैरन पैंजनिया,
नित चरणों में रहती,
छमक छमक कर,
झनक झनक कर,
राधे को सहलाती,
बन ना सकी मैं पैरन पैंजनिया,
ये मेरी मज़बूरी,
जो मैं होती कान्हा की बंसी,
नित अधरों पर रहती,
राधा राधा नाम टेर कर,
राधे को मैं बुलाती,
बन ना सकी मैं अधर की बंसी,
जो मैं तेरा पता जानती,
खत लिखती भिजवाती,
सब रसिकन को साथ में लेके,
तुझसे मिलने आती,
पता तेरा मेरे पास नहीं है,
जो तुम होती पास हमारे,
हाथ पकड़ बिठलाती,
पास बैठकर तुझको श्यामा,
मन की बात सुनाती,
मेरी तो मज़बूरी राधे,
पर तेरी क्या मज़बूरी,
स्वर – बृजरस अनुरागी पूनम दीदी जी।
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