
राधा रानी से मिलना बहुत जरुरी
श्यामा प्यारी से मिलना बहुत जरुरी
जे मैं होती पवन बसंती तो मैं भवन उड्ड जाती
राधा रानी की चुनरी को लहर लहर लहराती
वरना सखी मैं पवन बसंती एह मेरी मजबुरी
राधा.......
जो मैं होती मेल चमेली तो मैं भवन उड्ड जाती
राधा रानी के चरनो की धुल मुझे मिल जाती
वरना सखी मैं मेल चमेली एह मेरी मजबुरी
जो मैं होती वन की मोरनी छम छम नाच दिखाती
नाच नाच और कूद कूद राधे को मैं रिझाती
वरना सखी मैं बनके मोरनी एह मेरी मजबुरी
जो मैं होती काली बदरिया छम छम नीर बहाती
गरज गरज और बरस बरस के राधे को नहलाती
वरना सखी मैं काली बदरिया एह मेरी मजबुरी
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