
राधिके ले चल परली पार,
जहा विराजे नटवर नागर,नटखट नन्द कुमार
किशोरी ले चल परली पार,
गुण अवगुण सब उनको अर्पण,
पाप पुण्य सब उनको समर्पण
मैं उनके चरणन की दासी,
उनसे आस लगा बेठी हु ,
लज्जा शील गवा बेठी हु ,
सांवरिया मैं तेरी रागनी तू मेरा मल हार,
तेरे सिवा कुछ चाह नही है
कोई सुजाती राह नही है मेरे प्रीतम मेरे माजी,
सुनियो करुण पुकार,
आनंद धन यहाँ बरस रहा है पता पता हर्ष रहा है
बहुत हुई अब हार गई मैं पड़ी पड़ी मजधार,
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