
राधे कर चुनरी दी छां के अज मेरे शाम ने आना / ਓ ਰਾਧੇ ਕਰ ਚੁੰਨਰੀ ਦੀ ਛਾਂ ਕਿ ਅੱਜ ਮੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਨੇ ਆਉਣਾ
राधे कर चुन्नरी दी छां
धुन – बन तितली मैं उड़दी फिरां
ओ राधे, कर, चुन्नरी दी छां,
कि अज्ज मेरे, शाम ने आउणा ॥
शाम ने, आउणा मेरे घन, शाम ने आउणा ॥
ओ सारी, दुनिया, जपे जीहदा नांअ,
राधे, कर, चुन्नरी दी छां, कि अज्ज मेरे...
हथ विच, बंसी लै के, शाम मेरे आणगे,
शाम मेरे आणगे ।
आपणे, प्यारियां नूं, दरश दिखाणगे,
दरश दिखाणगे ॥
ओ बैठे पलकां, विछा के, थां थां,
मोटे मोटे, नैण ओहदे, टेढ़ी मेढ़ी चाल ए,
टेढ़ी मेढ़ी चाल ए ।
गोपियां, गवाले गऊआं, राधा जी वी नाल ए,
राधा जी वी नाल ए ॥
ओ की की, शाम दी मैं, सिफ़त करां,
सोहणे शाम, तेरे उत्ते, आया साडा दिल वे,
आया साडा दिल वे ।
यमुना, किनारे किते, आ के सानूं मिल वे,
आ के सानूं मिल वे ॥
ओ तेरे, चरणां च, सीस मैं धरां,
अपलोडर – अनिल राममूर्ति भोपाल
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