
राधे तेरे चरणों की बन गई मैं दासी,
तेरे दर्श को अखिया प्यासी,
जब जब देखु तोहरी नगरियां,
भर भर आवे प्रेम गगरियाँ,
आई मैं शरण तुम्हारी,
तेरी मोहनी शवि निराली,
करती हो सबकी रखवाली,
आई मैं शरण तिहारी,
बरसाने के गली रंगीली,
छाए रही छवि छठा छबीली,
मैं इस पे बलहारी,
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