
राम बिना जगत में,
कोई नहीं है अपना रे,
सच केवल राम है,
बाकी जग झूठा सपना रे,
राजीव मुझसे रहें राम राजी,
ऐसा कर्म मुझे करना है,
जहाँ धर्म है सत्य है,
मुझे उसी डगर पे चलना है,
मुझ पर मेरे राम की कृपा है,
जो अब तक मैं संभला हूं,
सदा सर्वदा संकटों से,
ले नाम राम का निकला हूं,
राम मेरे मैं हूं राम का,
फ़िकर भला क्यूं करना रे,
है नाम राम का सुखदाई,
सदा राम को भजना रे,
राम शरण में जब से हूं आया,
बिन मांगे सब है पाया,
दुखों का साया होगा क्यूं,
मुझ पे है जो राम का साया,
जहाँ राम हैं यश वहीं है,
मधुर वहीं जीवन रसना रे,
राम हृदय में बसे हैं मेरे,
मुझे राम चरणों में बसना रे,
© राजीव त्यागी नजफगढ़
रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं
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