
राम सुमर रे प्राणिया,
भूले रे मत भाई,
सुमिरण बिना छूटे नहीं,
जम द्वारे जाई,
सब दुनिया भरमी फिरे,
तीर्थ अरु व्रता,
जैसे पानी ओस रा,
कछु कारज नहीं सरता,
तपसी त्यागी मुनिस्वरा,
पढियोड़ा अर पंडिता,
नाम बिना खाली रहया,
सिध्द उड़ता अर गढ़ता,
क्या रे आचार विचार हैं,
क्या है साधन सेवा,
सतगुरु बिना पावे नहीं,
आत्म निज भेवा,
जगत भेक एको मता,
एकण दिश जावे,
तत्व नाम जाणे नहीं,
फिर फिर गोता खावे,
साध संगत निश दिन करे,
एको रामजी ने धावे,
रामदास धिन सन्त जना,
निर्भय रा पद पावे,
गायक – मोहनदास रामस्नेही।
प्रेषक – रामेश्वर लाल पँवार।
आकाशवाणी सिंगर।
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