
रूप रूपाला घना मतवाला,
चारभुजा सिरमोड,
कोटडी वाला जी।।
मोर मुकुट पीतांबर सोवे,
श्याम बरन छवि मंनडो मोवे,
चारभुजा चित चोर,
हाथों में भाला भल भल भलके,
दाढ़ी में हीरो चम चम चमके,
श्याम रूपल जी,
गले वैजयंती माल बिराजे,
पगलिया री पायल छम छम बाजे,
रंग रसिया घनश्याम,
हस्ती थाके चवर धुलावे,
महिमा था कि वरर्णी न जावे,
भगता रा सिरमोड,
लेखक / गायक – दिनेश अमरवासी।
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