
लड्डू गोपाल आया लड्डू गोपाल
मेरे घर आया मेरा लड्डू गोपाल संग में है लाया देखो खुशियां अपार
मेरे अंगना में बधाई बाजे सुन सुन सुन सुन
कान्हा जी घर आए कान्हा जी घर आए
मन मेरा हर्षाए कान्हा जी घर आए
चंदन के सिंहासन पर कान्हा को बैठाऊं मैं केसर तिलक लगाऊं देखो
माखन मिश्री दूध मलाई कान्हा को खिलाऊं मैं पंखा चंवर डूलाऊं देखो
वह तिरछी नैन का जादू कर देता है बेकाबू
मैं नांचू और गाऊं कान्हा के आगे छम छम छम छम
पहन पितांबर आया वो मोर मुकुट सजवाया वो कितना प्यारा लागे मोहना
गले मोतियन की माला है चंदा सा उजियाला है महक उठा है मेरा अंगना
वो चाल चले मतवारी टेढ़ी और ठुमके वाली
जाऊं बलिहारी कान्हा पे अरि सुन सुन सुन सुन
कारी कारी मतवारी अंखियां लागे प्यारी घायल कर दिन्यो चितचोर
गोपियों की शान है मनमोहक मुस्कान है दिल भी चुराता है ये माखन चोर
पूनम के भाग्य जगे हैं कान्हा के दरश मिले हैं
वो कहती ही जाती क्या कहती अरि सुन सुन सुन सुन
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