
लहरियों भींजे रे कानूड़ा रंग बरसे
लहरियों भींजे रे,
कानूड़ा रंग बरसे,
म्हारो हिवड़ो हबोला खाय,
चन्दन चौकी रे क़ानूड़ा बैसणो,
कोई फूलो जड़ियों रे बाजोट,
चावल रंधाऊ रे क़ानूड़ा ऊजला,
कोई हरिये मूंगा री दाळ,
पोळी पोउ रे क़ानूड़ा लड़ छड़ी,
तीवण तीस बत्तीस,
थाल परोसे रे क़ानूड़ा राधिका,
कोई नेवर रा झनकार,
जीमत निरखु रे क़ानूड़ा आँगळी,
कोई मूलकत निरखू दाँत,
मूंग फली सी रे क़ानूड़ा आँगळी,
कोई दांत दाड़म रा बीज,
जिमिया झूठिया रे क़ानूड़ा प्रेम सू,
कोई इमरत चळू रे कराय,
चन्द्र सखी री रे क़ानूड़ा विनती,
कोई सुण जो चित लगाय,
प्रेषक – रामेश्वर लाल पँवार।
आकाशवाणी सिंगर।
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