
लाल चुनरियाँ ओढ़ के मैया आंबे आएगी,
जगराते की रात भगतो बिगड़ी बनाये गी,
जयकारा सब को लगना है आज अम्बे को भुलाना है,
अम्बे के दरबार में भक्तो जो भी आ गया,
बिन मांगे ही द्वार से माँ अम्बे से पा गया,
जरा जोर से बोलो जय जय माँ,
अरे सारे बोलो जय जय माँ,
आपने भक्तो को माँ अम्बे दर्श दिखाए गी,
जैकारो की गूंज से पापो का विनाश हो,
सच्चे मन से जो बोले पूरी उसकी आस हो,
खुश आकर माँ आज हमे चरणों से लगाए गी,
कंजका रूप धार के जगदाति वो आये गई,
भोली सूरत माँ तेरी भगतो की मन भा गई,
माँ दिया बाण है भगतो की शान है,
तेरी भी सत्यपाल अम्बे कष्ट मिटाये गी.
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