
लिखने वाले लिख लिख हारे,
शिव की अमर कहानी।।
तर्ज – लिखने वाले ने लिख डाले।
रीझे तो सुर असुर ना देखे,
ऐसे औघड़ दानी, सदाशिव,
ऐसे औघड़ दानी,
सच कहते है अधिक ही भोले,
तुम्हरे नाथ भवानी, भवानी,
भस्मासुर पर कृपा लुटाई,
अपनी विपदा आप बुलाई,
हरी ने हर की रक्षा की तब,
बनकर नारी सुहानी, सुहानी,
सिंधु से निकला गरल पचाया,
श्रष्टि को जलने से बचाया,
भूतनाथ पर उपकारी को,
प्यारा है हर प्राणी,
शिवजी को जल बहुत सुहाए,
फिरते है गंगा सिर पे उठाए,
जो मांगो वरदान में दे दे,
पा लुटिया भर पानी,
गायक & लेखक
“स्व. श्री रविंद्र जैन”
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