
लिख दो म्हारे रोम रोम में,
राम राम हो रमापति।
दोहा – संत हमारी आत्मा और,
मै संतन की देह,
रोम रोम में रम रया,
प्रभु ज्यु बादल बिच महेश।
राम राम हो उमापति,
लिख दो जय सियाराम जी।।
शीश पे म्हारे शिवजी लिख दो,
कानो पे कन्हैया राम,
नैणो में नरसिंह लिख दो,
नाक पे नंदलाला राम,
होंठों पे हरिहर लिख दो,
दांतो पे दयालु राम,
जीभ पे जगदीश लिख दो,
कंठ पे कमलापति राम,
गला में म्हारे गिरधारी लिख दो,
मुख पर मुरली वाला राम,
भुजा पे भगवान लिख दो,
हाथो पे हनुमाना राम,
छाती पे चतुर्भुज लिख दो,
पेट पे परमेश्वर राम,
जान्गो में जगदम्बा लिख दो,
नाभी पे नारायण राम,
गोडा म्हारे गोविंदा लिख दो,
पिन्दी में परमानन्द राम,
सुन्डी पे अचागिरी लिख दो,
चरणों में चारो ही धाम,
इतरो तो लिख दिजो दाता,
भवजल पार उतारो राम,
लिखमो थारे चरणे आवे,
एक अरज सुन लिजो राम,
गायक – अनिल नागौरी।
प्रेषक – श्रवण कुमावत।
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