
हट पकडी तो एडी पकडी मानो,
अजमल जी लाडलो थारो,
के उड गयो दूर नब मे,
ले घोडलीयो गुदड़ा वालो,
ले उड गयो दूर नब मे।।
सोच रया सगला बात मन मन मे,
कैया लालो उड रयो बादली गगन में,
देख्या दरजी ने दिन माहि तारा,
हर कोई केवे है जादू वालो दरजी,
घोडलीयो बनाय दियो कंवरा ने फरजी,
अजमलजी रो चढ गयो पारो,
हाथो हाथ दरजी ने मिल गयो परचो,
मानो तो है अब थारो मच गयो चर्चो,
सदा भगता रो रिजे हितकारो,
प्यारा डाली सुगना ने प्यारा लागे हरजी,
‘प्रेम’ री अरज सुन आणो थाने पडसी,
म्हाने भवसाग ऊबारो,
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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