
ले लो शरण कन्हैया
ले लो शरण कन्हैया दुनिया से हम है हारे ।
नहीं थोर ना ठिकाना फिरते है मारे मारे ।।
गुजरी है जिंदगानी अश्को को पीते पीते ,
बिता जो मुझपे कान्हा किसी और पे ना बीती ।
छोटी सी जिंदगी है और गम है ढेर सारे ,
अब तक निभाया मैंने जिनसे भि रिश्तेदारी,
निकला वही कन्हैया सुख चैन के शिकारी ।
किस पर करे भरोसा देते है दगा सारे,
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