
वृषभान की दुलारी
वृषभान की दुलारी मेरी और भी निहारो
मैं हु शरण तिहारी अपनी शरण लगा लो
कोई नही है मेरा इक आसरा तुम्हारा
उसे मिल गई है मंजिल जी को दिया सहारा,
मजधार मेरी नैया भव पार तुम उतारो
कोई न जग में दूजा तुसा हे श्यामा प्यारी,
हे करुना मई किशोरी तेरी प्रीत है निराली,
आँचल में अपने श्यामा इक बार तो बिठा लो
हर पल गिरा रहा मैं इस झूठे जग में श्यामा
तू ही मेरी है मंजिल तू ही मेरा ठिकाना
करके नजर किरपा की चरणों से तुम लगा लो
उपकार इतना करना कर दो मुझपे हे श्यामा प्यारी,
कस के पकड़ लो बहियाँ छुटे न फिर हमारी,
देखू युगल छवि नित मुझे वृंदावन वसा लो
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