
जो विश्वास में विष पी करके,
हस के सही हर पीड़ा,
वो है श्याम दीवानी मीरा,
मीरा प्रेम दीवानी मीरा।
देखे – काहे तेरी अखियों में पानी।
सुख दुःख का जिसे ख्याल ना आए,
बस गिरधर को मन में बसाए,
जिसका दिल चन्दन सा महके,
मुख चमके ज्यूँ हिरा,
कृष्ण प्रेम की पगली प्यासी,
महारानी घूमे बन दासी,
जिसकी आँख से हरपल छलके,
प्रेम विरह का नीरा,
विरह में डूबी याद में खोई,
श्याम के प्रेम में ‘लहरी’ रोई,
प्रभु प्रेम में चली ‘बेधड़क’,
जो बनकर के फकीरा,
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