
शंकर जी का डमरू बाजे
पार्वती का नंदन नाचे ॥
बर्फीले कैलाशिखर पर,
जय गणेश की धूम
ओ जय हो…
नाचे धिन धिन धिन्तक धिन ॥
नाचे धिन धिन, नाचे धिन धिन,
धिन्तक धिन्तक नाचे
मनमोहक, मनभावन, नटखट
मूषक गण भागे सरपट ॥
विघ्न विनायक, संकट मोचन
वक्रतुंड कजरारे लोचन ॥
झूमे गए बल गणेश
भक्तजनो की कटे कलेश॥
सुनकर इतना ज्यादा शोर,
पार्वती आई उस और ॥
डरकर माता उमा के आगे,
दुम दबाकर मूषक भागे ॥
पर अपनी धुन में मस्त गजानन,
थिरक रहे है भूलके तन मैं ॥
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