
शंकर भोले कृपा कीजे,
मैं आधीन तुम्हारा,
भोले नाथ मुझ पर कृपा कीजो,
मैं हू दास तुम्हारा।।
चावल चंदन और सुपारी,
और दूधन की धारा,
जटा मुकुट में गंगा खलके,
सैंस गले फन काला,
भांग धतूरा अम्ल आरोगे,
और विषन का प्याला,
बैल चढ़े शिव शंख बजावे,
पार्वती वर प्यारा,
डावे पग में पदम विराजे,
और गले रुद्र माला,
चांद ललाट शिवजी के भलके,
वो भी स्याम हमारा,
गहरी गहरी नदिया नाव पुरानी,
किस विध उतरू पारा,
‘तानसेन’ शिवजी रा गुण गावे,
भवजल उतरो पारा,
गायक – पेमाराम जयपाल धारवी।
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