
शुकरीयाँ लखदातार शुकरीयाँ लख्दातर
इतना दिया है जिसका बाबा न था मैं हकदार,
शुकरीयाँ लखदातार शुकरीयाँ लख्दातर,
आज जो कुछ भी हु तेरे एहसान है
तेरे नाम से ही मेरी पहचान है,
गिन भी नही पाऊ मैं बाबा इतने तेरे उपकार,
कर्म ऐसे भी न थे कुछ अच्छे मेरे,
भाव दिल में भी न ये श्याम सचे मेरे,
मुझ जैसे पापी को बाबा तुमने किया सवीकार,
मोहित कैसे करे शब्दों में धन्ये वाद,
तूने पूरी करी मेरी हर इक मुराद ,
भजनों की सेवा का बाबा मुझको दिया उपहार,
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