
शुभ मंगल शुभ अवसर आयो,
जुग पुनि राम राज को आयो।।
तर्ज – मंगल भवन अमंगल हारी।
भए आसन आरूढ़ रघुराई,
दीप जले मन आनंद छाई।
राम सिया राम सिया राम जय जय राम,
जनकसुता अरु लक्ष्मण भाई,
पवनपुत्र पायक बलदायी।।
दियो बलिदान भगत बहु संता,
अवध राज साजे भगवंता।।
राम नाम पावन अति भारी,
जपत निरंतर जनम सुधारि।
सत्य सनातन भगवा छायो,
जन्मभूमि मंदिर मन भायो।।
जनक दुलारी संग अवध बिहारी,
जगत जाए दर्शन बलिहारी।
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