
शेरावाली का लगा है दरबार,
जयकारा माँ का बोलते रहो,
मेहरवाली का सजा है दरबार,
जयकारा माँ का जयकारा,
पर्वत की ऊँची सी चोटी,
चोटी ऊपर जगती ज्योति,
बैठी शेर पे होके सवार,
ढम ढम ढोल नगाड़े बाजे,
झूम झूम के जोगन नाचे,
माँ की हो रही जय जयकार,
बजरंगी माँ की सेवा में खड़े,
भैरोनाथ आरती उतारे,
गंगा मैया रही चरण पखार,
लुटा रही माँ अटल खजाना,
भर भर झोली लुटे जमाना,
माँ ने खोल दिए रे भंडार,
स्वर – राजू मेहरा जी।
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