
शोभाराम जी की जीवनी लिखित में
शोभाराम जी की जीवनी,
दोहा – कठे देवगढ़ कठे द्वारका,
कटे भगत भगवान,
बळता बागा ने जाय बुझावे,
पाछा पहुंचे ठाण ठिकाण।
जय जय विश्वकर्मा जी का पुत्र लाडला,
आप री महिमा अपरंपार,
म्हारा शोभाराम जी महाराज,
आपने वंदन बारंबार।
देवगढ़ में मांडावाडा में,
शोभाराम जी नाम,
प्रगटिया संत बड़ा
जनमिया भक्त बड़ा।।
विक्रम संवत माही 1910 में,
भादवा रा महीना माही,
आनंद चवदस ने,
मेवाड़ मुलक रे माय,
आप रो मांडावाड़ा रे माय,
जनमिया संत बड़ा,
प्रकटिया संत बड़ा।।
पिता दाऊ रामजी और,
माँ शायर बाई,
जांगिड़ सुथार जाति,
ब्राह्मण केवाई,
श्री विश्वकर्मा रा पूत,
हिवडे द्वारिका रो रूप,
गुरुवर समुंदर रिषी,
हिमाचल से आया,
सरवर का भोपा रा,
आसन जमाया,
पाई गुरुवर सु अब दीक्षा,
चाल्या जगत देवण ने शिक्षा,
द्वारिका रा नाथ रो,
बागो बळतो देख्यो,
पल में बुझवाय बैठ्या,
अचरज देख्यो,
होग्या काळा हाथ,
राणाे पूछे बताओ बात,
खबर मंगाई राणो,
द्वारिका सु सारी,
भगता या बात साची,
बोले पुजारी,
राणाै जोड़े दोनों हाथ,
कर दी सब बेगारी माफ,
कर्मा री गत न्यारी,
पगल्या पूजावे,
उड़ जावे हंस पर,
भूल नहीं पावे,
पावे यश कीर्ति सम्मान,
पावे परम पद बहूमान,
अटल समाधि पाई,
मघसर छट ने,
भगता रा भाग जाग्या,
मेट्या संकट ने,
भागवत गावे चरणा माय,
सुरेश यो ध्यावे अंतर माय,
गायक – भगवत जी सुथार।
प्रेषक – कृष्णा कांत जांगिड़।
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