
श्यामा प्यारी कृपा कीजिये चरणों से लगा लीजिये
श्यामा प्यारी कृपा कीजिये,
दोहा – अब कृपा करो श्यामा प्यारी,
मोहे अपनी शरण लगा लीजे,
बन महल टहलरी रहूं मैं सदा,
बस इतनी आस पूजा दीजे,
विचरत डोलूं ब्रज गलियन में,
बरसाना माहि बसा लीजे,
मैं दिन हिन व्रत शीण प्रिया,
मोहे करुणा कर अपना लीजे,
चरणों से लगा लीजिये,
बरसाना बसा लीजिये,
मुझको अपना बना लीजिये,
बरसाने की ऊँची अटारी,
जहाँ विराजे श्यामा प्यारी,
गुण अवगुण ना जानन वारी,
ममता मई वृषभानु दुलारी,
राधे करुणा नजर कीजिये,
आँचल में छुपा लीजिये,
बरसाने रस प्रेम अपारा,
बहती है अमृत की धारा,
बेसहारो का है सहारा,
मिलता है यहाँ नन्ददुलारा,
प्रीत करना सीखा दीजिये,
मोरकुटी पे मोर बिहारी,
प्रेम सरोवर शोभा न्यारी,
गेहबरबन की महिमा भारी,
खोर सांकरी दान बिहारी,
राधे मुझको शरण लीजिये,
ब्रज धूलि बना दीजिये,
लौट के श्यामा घर नहीं जाऊँ,
चरणन की रज निशदिन पाऊँ,
मेहलन पौड़ी चढ़ता जाऊँ,
रसिक जनों का संग मैं पाऊँ,
राधे इतनी दया कीजिये,
दूर चरणों से ना कीजिये,
स्वर – विक्रम जी वेद।
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