
श्यामा प्यारे आजा....
श्यामा प्यारे आजा, व्याकुल भरी ये राधा,
तुझ बिन अखियां तरस गयी है,
अब तो दर्श दिखा जा, श्यामा प्यारे आजा।
सूना सूना गोकुल है, छायी ख़ामोशी गलियन में,
मुरझाई सब कलियाँ है, फूल खिले न कुंजन में,
लेकर आंसू अँखियन में, रोती गईया मधुवन में,
प्यासे मन की ओह निर्मोही, अब यतो प्यास बुझा जा।
सूना तट सुना पनघट, सूनी युमना धारा है,
जब से गए हो तुम श्यामा, रोता ब्रीज ये सारा है,
द्वार बाल और ब्रिजबाला ,पूछे कहा गया काला,
ओ बेदर्दी अब तो आकर हमको गले लगा जा।
याद तेरी तड़पाये है, हमको कुछ नहीं भाये है,
हमको नींद नहीं आती, चैन जिया नहीं पाए है,
अब तो रास रचा जा तू, मुरली मधुर बजा जा तू,
व्याकुल मन नहीं धीर धरे है, आकर के समझा जा।
कान्हा तुम कब आओगे, हमको दर्श दिखाओगे,
रखी भरी मटकी, आकर कब तुम खाओगे,
मुरली मधुर सुनाओगे, कब तुम रास रचाओगे,
प्यारे कन्हैया, दाऊ के भईया, आके प्रीत निभा जा।
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