
श्याम के उपकारों को मैं ना भूलूंगा
मैं ना भूलूंगा,
श्याम की किरपा,
श्याम की रहमत,
श्याम के उपकारों को,
तर्ज – मैं ना भूलूंगा।
की टुटा हर सपना,
क्यों रूठा हर अपना,
मेरी सांसे चाहे,
कन्हैया अब थमना,
लूट लिया था मुझको मेरे,
चाहने वालों ने,
उन रिश्तों को उन सपनों को,
उन रिश्तेदारों को,
ख़ाक से हमको तो,
उठाया तुमने ही,
कोयले से हिरा,
बनाया तुमने ही,
आज मिली जो खुशियाँ बाबा,
तेरी मेहरबानी है,
तेरी लीला तेरे करिश्मे,
तेरे चमत्कारों को,
बचाया तुमने ही,
बसाया तुमने ही,
हर कदम ‘मोहित’ को,
निभाया तुमने ही,
सौंप दिया है मैंने जीवन,
अब तेरे हाथों में,
तेरे चरण में बहने वाली,
उन असुवन धारा को,
स्वर – संजय मित्तल जी।
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